बलिया।केवल पाठ्य पुस्तक पढ़ने वाला व्यक्ति नहीं बल्कि मार्गदर्शक, प्रेरक और आदर्श भी बने शिक्षक:BSA मनीष कुमार सिं

केवल पाठ्य पुस्तक पढ़ने वाला व्यक्ति नहीं बल्कि मार्गदर्शक, प्रेरक और आदर्श भी बने शिक्षक:BSA मनीष कुमार सिंह

 संजीव कुमार सिंह बलिया।राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद उत्तर प्रदेश लखनऊ के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय मानवीय एवं संवैधानिक मूल्यों पर आधारित शिक्षक प्रशिक्षण के प्रथम बैच का उद्घाटन करते हुए प्राचार्य /उप शिक्षा निदेशक मनीष कुमार सिंह द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर प्रारंभ किया गया। इस प्रशिक्षण में शिक्षा क्षेत्र बेलहरी,बैरिया, मनियर, पंदह,मुरली छपरा,,रेवती,बेरुअरबारी और नगरा के 12-12 शिक्षकों द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है जो आज दिनांक 11 मार्च 2026 से प्रारंभ होकर 13 मार्च 2026 तक आयोजित होना है। सेवारत शिक्षक प्रशिक्षण के प्रभारी डायट प्रवक्ता डॉक्टर मृत्युंजय सिंह एवं इस प्रशिक्षण के नोडल रवि रंजन खरे द्वारा पंजीकरण के उपरांत शिक्षकों को पूर्ण मनोयोग से प्रशिक्षण में सम्मिलित होने का आह्वान किया गया। प्रवक्ता जानू राम द्वारा अपने उद्बोधन में बताया गया कि शिक्षा केवल ज्ञान या सूचना देने की प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह मानव निर्माण की एक सतत श्रृंखला है। यदि शिक्षा में मूल्य का समावेश नहीं होता तो यह केवल कौशल और तकनीकी दक्षता तक ही सीमित रह जाती, ऐसे में समाज की भौतिक प्रगति तो होती किंतु नैतिक पतन और संवेदनहीनता की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है ।शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य तभी पूर्ण होता है जब वह विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के साथ ही भावनात्मक एवं नैतिक विकास में भी योगदान करें। प्रशिक्षण के नोडल रविरंजन खरे द्वारा आह्वान किया गया कि आज का समय वैज्ञानिक प्रगति, सूचना क्रांति और वैश्वीकरण की है ।विद्यार्थियों के सामने और असंख्य अवसर तो आते हैं परंतु जीवन में तनाव ,नैतिक द्वंद्व और सामाजिक असमानताएं भी बढ़ती हैं ।ऐसे में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं बल्कि जीवन को सार्थक और संतुलित बनाना भी होना चाहिए ।मूल्य आधारित इस प्रशिक्षण में हम सभी मिलकर इन चुनौतियों का सामना करने के लिए नैतिक शक्ति को प्राप्त कर सकेंगे ऐसा हमें पूर्ण विश्वास है। डायट प्रवक्ता किरण सिंह द्वारा शिक्षकों के मानवीय एवं संवैधानिक मूल्यों के प्रति अधिक जागरूक होने की बात बताई गई जिसमें शिक्षण में मूल्य का समावेश करने ,उनका दृष्टिकोण और अधिक समानुभूतिपूर्ण तथा संवेदनशील बनाने की दिशा में समय-समय पर मूल्य आधारित प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल दिया गया। डायट प्रवक्ता अविनाश सिंह द्वारा कंप्यूटर का शिक्षा में प्रयोग तथा उसकी उपयोगिता के बारे में जानकारी प्रदान की गई और बताया गया की शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं है बल्कि एक ऐसी प्रक्रिया है जो मनुष्य को एक बेहतर और संवेदनशील नागरिक बनाती है ।यह एक ऐसे प्रकाश पुंज के समान है जो मनुष्य के जीवन को ज्ञान के प्रकाश से परिपूर्ण करते हुए एक जिम्मेदार नैतिक एवं मूल्य आधारित नागरिक बनाती है जिससे देश और समाज की उन्नति एवं विकास में अपना अहम योगदान दिया जा सके।

इस प्रशिक्षण में प्रतिभाग़ कर रहे बेलहरी शिक्षा क्षेत्र के अध्यापक, पूर्व एकेडमिक पर्सन डॉक्टर शशि भूषण मिश्र द्वारा बताया गया कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना में न्याय ,स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे बहुमूल्य सिद्धांतों का प्रयोग किया गया है जिन्हें अपनाकर शिक्षक अपने आप में सशक्त बन सकता है तथा कक्षाओं में आत्मसात कराकर समाज की नई रूप रेखा का निर्माण कर सकता है जिस पर आगे चलकर सहिष्णुतापूर्ण, समावेशी एवं समतामूलक और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण सामाजिक वातावरण का सृजन किया जा सकता है। डायट प्रवक्ता डॉ जितेंद्र गुप्ता द्वारा बताया गया कि शिक्षक भविष्य निर्माता है तथा उनके द्वारा विद्यार्थियों में रोपित मानवीय एवं सामाजिक मूल्यों का बीज एक दिन विशाल वृक्ष बनकर हमारे समाज को मानवीय गरिमा एवं न्याय की शीतल छाव प्रदान करेगा। तकनीकी सहयोग अमित कुमार चौहान तथा चंदन मिश्रा द्वारा प्रदान किया गया।

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