बलिया।तिजोरियों में पैसा, बच्चों की थालियाँ खाली — मिड-डे मील की व्यवस्था पर भरोसा कैसे लौटे?

तिजोरियों में पैसा, बच्चों की थालियाँ खाली — मिड-डे मील की व्यवस्था पर भरोसा कैसे लौटे?

 संजीव सिंह बलिया (बांसडीह)। ताजपुर मुड़ियारी कॉलेज में मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) योजना की ऐसी खुलासे ने शिक्षा और भ्रष्टाचार दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि दो साल तक सरकार का रिकॉर्ड “भोजन वितरित” दिखाता रहा, जबकि बच्चों की थालियाँ खाली रहीं। मामला बच्चों की लिखी चिट्ठी से उजागर हुआ, जिसने जिलाधिकारी का ध्यान खींचा और जांच की लाजिमी करवायी गई।

बच्चों ने इंटरनेट के माध्यम से जिला मजिस्ट्रेट का पता ढूंढकर निजी पहचान छिपाने की गुहार के साथ शिकायत भेजी। डर के कारण उन्होंने अपना नाम सार्वजनिक न करने की अपील की और गुप्त जांच की मांग की। शिकायत मिलने पर डीएम ने तुरंत बीएसए और डीपीआरओ से जांच कराई, जिनकी रिपोर्टों में लगभग 14 लाख रुपये की अनियमितता की बात सामने आई है।

जांच में पाया गया कि मिड-डे मील के लिए सरकार द्वारा हर महीने जारी की जा रही धनराशि का लेखा-जोखा कागजों पर सही दिखता रहा, पर स्कूलों में वास्तविक खाद्य वितरण नहीं हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि प्रणालीगत निगरानी में कमी और जवाबदेही तंत्र की खामियाँ बच्चों तक भोजन न पहुँचने का कारण बनीं।

प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर मिड-डे मील के प्रभारी अजीत पाठक पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया जाएगा और जिन स्कूलों/अधिकारियों की भूमिका पायी जाएगी, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिए हैं कि प्रभावित बच्चों को तुरंत मिड-डे मील उपलब्ध करायी जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था कड़क की जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि अकेले एक कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं होगी; मिड-डे मील वितरण, ऑडिट, भुगतान सत्यापन और सामुदायिक निगरानी के बहुआयामी सुधार की आवश्यकता है। यदि स्थानीय अभिभावक, पंचायत और स्कूल प्रबंधन मिलकर नियमित निगरानी करें और भुगतान का पारदर्शी मिलान (कोई तीसरे पक्ष का सत्यापन) हो, तो धन के दुरुपयोग की संभावनाएँ घटेंगी।

मामले ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि अंतिम जांच किस हद तक पारदर्शी होगी और पाई गई अनियमितताओं की पूरी सूची कब सार्वजनिक होगी। साथ ही यह भी देखने की बात होगी कि शिक्षा विभाग बच्चों के आहार और पोषण सुनिश्चित करने के लिए कितने जल्दी ठोस कदम उठाता है।

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