आगरा के दयालबाग शिक्षण संस्थान की डा. आशिमा श्रीवास्तव को पेरिस में मिला केयर गिवर अवॉर्ड 

आगरा के दयालबाग शिक्षण संस्थान की डा. आशिमा श्रीवास्तव को पेरिस में मिला केयर गिवर अवॉर्ड 

आगरा : उत्तर प्रदेश में ताज नगरी के नाम से विश्व भर में पहचान बनाने वाले आगरा के दयाल बाग शिक्षण संस्थान की प्रख्यात मनोवैज्ञानिक डाक्टर आशिमा श्रीवास्तव ने पेरिस में केयर गिवर अवॉर्ड पाकर आगरा को एक नई पहचान दिलाने का कार्य किया है।

आपको बताते चले कि डाक्टर आशिमा श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश की एक वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक है जो वर्तमान समय में आगरा के दयाल बाग शिक्षण संस्थान में तैनात है। जिन्होंने आगरा के नाम को एक नई पहचान दिलाते हुए पेरिस में हुए कार्यक्रम में केयर गिवर अवॉर्ड प्राप्त करके किया है यह पुरस्कार उनके द्वारा मानसिक स्वास्थ्य, मनोविज्ञान और समाज सेवा (विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों के लिए) के क्षेत्र में दिए गए उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देता है। मानसिक स्वास्थ्य और मनोविज्ञान के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता को वैश्विक मंच पर भी सराहा जाता है, जिसके तहत उन्हें अन्य प्रतिष्ठित आयोजनों जैसे पेरिस आर्किटेक्ट फोरम में भी आमंत्रित किया जा चुका है। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत करियर में बल्कि भारत और दयालबाग के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, जो वैश्विक स्तर पर भारतीय चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

प्रशस्ति पत्र और 20 हजार यूरो का मिला नकद पुरस्कार

  दयालबाग की डा. आशिमा श्रीवास्तव ने, जिन्हें फ्रांस में आयोजित न्यूरोइमेजिंग समुदाय के महाकुंभ ( ओएचबीएम सम्मेलन) में अंतरराष्ट्रीय ‘केयर गिवर अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। विशेष आवश्यकता वाले (दिव्यांग) बच्चों की वाणी, व्यवहार और उनके समग्र जीवन को संवारने के लिए डा. आशिमा को यह सम्मान 20 हजार यूरो की पुरस्कार राशि के साथ दिया गया। वैश्विक मंच पर मिला यह सम्मान आगरा ही नहीं, बल्कि पूरे देश के सामाजिक और अकादमिक क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

मानव मस्तिष्क मानचित्रण संगठन (ओएचबीएम) के 32वें वार्षिक सम्मेलन फ्रांस में 14 से 18 जून, 2026 तक आयोजित किया गया। इस पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया भर के न्यूरोइमेजिंग समुदाय के 4,000 से अधिक शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों ने भाग लिया। आयोजन के दौरान मस्तिष्क मैपिंग, न्यूरोइमेजिंग तकनीकों में प्रगति और ओपन-साइंस जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गई, जहाँ डॉ. आशिमा ने दयालबाग और भारत का प्रतिनिधित्व किया।

दिव्यांगों के लिए समर्पण: डा. आशिमा एक प्रतिष्ठित काउंसलर एवं शोधकर्ता हैं। उन्होंने शुरुआती दिनों में शाहजहांपुर में दिव्यांग बच्चों की सहायता और उनके समावेशन के लिए ‘संवाद’ संस्था की स्थापना की थी, जिससे कई बच्चों को नई दिशा मिली। वह शाहजहांपुर में पुलिस के परिवार परामर्श केंद्र में भी बतौर काउंसलर लंबे समय तक अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।

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