उत्तराखंड के लड़के ने अपना शरीर मेडिकल रिसर्च के लिए कर दिया‌‌ दान

उत्तराखंड के लड़के ने अपना शरीर मेडिकल रिसर्च के लिए कर दिया‌‌ दान

करीब 60,000 से ज्यादा मिश्रित पौधे लगाये

6000 छोटे तालाब और पोखर बनाए

(आशुतोष शर्मा)नैनीताल। मरने के बाद दाह संस्कार के लिए पेड़ (लकड़ियाँ) ना जलाना पड़े इसलिए उत्तराखंड के इस लड़के ने अपना शरीर मेडिकल रिसर्च के लिए दान कर दिया।मुझे नहीं पता आज तक आपको चंदन के बारे में कुछ पता है कि नहीं लेकिन अगर नहीं मालूम है तो बहुत शर्म की बात है। कम से कम उत्तराखंड वालों को तो पता होना ही चाहिए।

जिला नैनीताल के एक छोटे से गांव नाई का यह एक जिसने न नौकरी को चुना, न शहर की चकाचौंध को। इसने जिस चीज़ को चुना उसके जुनून ने इन्हे आज पूरे देश में फेमस कर दिया है और हाल ही में उन्हें भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के द्वारा ‘वॉटर हीरो’ अवार्ड भी मिला। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में चंदन का जिक्र कर चुके हैं।

32 वर्षीय चंदन पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। आप उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति से परिचित हैं तो जानते होंगे की पहाड़ों पर बरसात का पानी टिकता नहीं है इसलिए चंदन नयाल ने भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए अपने आस पास के जंगलों में अब तक 6000 से ज्यादा चाल-खाल पोखर और खंटिया (छोटे तालाब) बना लिए हैं जिनमें बारिश का पानी जमा होता है और इससे भूजल स्तर एक तरह से रिचार्ज होता है।

इतना ही नहीं उन्होंने जंगलों की आत्मा को भी फिर से जीवित किया। उन्होंने अब तक करीब 60,000 से ज्यादा चौड़ी पत्ती के मिश्रित पौधे लगा लिए हैं, जिनमें बांज, बुरांश, खर्सु, रयाज, फल्याट, काफल आदि जैसे पेड़ शामिल हैं।

एक चैनल को दिए इंटरव्यू में चंदन बताते हैं कि “मैंने देखा कि हमारे जंगल जल रहे हैं… जहां कभी चौड़ी पत्ती के बांज, बुरांश, काफल और रयाज के मिश्रित जंगल होते थे, अब वहां सिर्फ सूखे चीड़ के जंगल रह गए हैं. वहां आग लग रही थी पानी के स्रोत सूख रहे थे, बस यहीं से उन्हें जीवन की दिशा मिल गई…”

आपको जानकर हैरानी होगी कि इन्होंने 2017 में अपना शरीर सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया है। इसके पीछे इनका कहना है कि “मैं इन पेड़ों से इतना प्यार करता हूं, इनके लिए इतनी मेहनत करता हूं कि मेरी मृत्यु के बाद भी मेरे लिए एक भी पेड़ न कटे. कोई प्रेरणा इनसे जुड़ी रहे, इसलिए अपना शरीर दान कर दिया…”

धन्य है पूरे देश में अपना ही नहीं उत्तराखंड का भी नाम रोशन करने वाले चंदन। मैं Gaon Wala की ओर से उन्हें बधाई देता हूं। आपसे प्रेरणा पाकर हर कोई पर्यावरण के प्रति सजग हो जाए यही मनोकामना।

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