बरेली।डीएम की नई मिसाल: बिना काफिले बस से पहुंचे ‘संपूर्ण समाधान दिवस’, अफसरों संग किया आम सफर

डीएम की नई मिसाल: बिना काफिले बस से पहुंचे ‘संपूर्ण समाधान दिवस’, अफसरों संग किया आम सफर

बरेली। जनपद में शनिवार को प्रशासनिक सादगी, ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण की एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसने वीआईपी संस्कृति पर बड़ा संदेश दे दिया। जिले के जिलाधिकारी ने सरकारी तामझाम और लंबा काफिला छोड़कर ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ में शामिल होने के लिए अधिकारियों के साथ बस से सफर किया।

आमतौर पर प्रशासनिक कार्यक्रमों में हूटर बजाती गाड़ियां, सुरक्षा वाहनों की कतार और अफसरों का अलग-अलग पहुंचना आम बात होती है, लेकिन इस बार नजारा पूरी तरह बदला हुआ था। डीएम के निर्देश पर सभी जिला स्तरीय अधिकारी अपने सरकारी और निजी वाहन कार्यालय में ही छोड़कर एक बस में सवार हुए। खास बात यह रही कि जिलाधिकारी स्वयं भी उसी बस में बैठकर कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे।

डीएम की इस पहल को प्रधानमंत्री Narendra Modi की ‘डीजल-पेट्रोल बचाओ’ सोच को धरातल पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। एक ओर जहां सरकारी ईंधन की बचत हुई, वहीं दूसरी ओर सड़कों पर अनावश्यक वाहन कम होने से ट्रैफिक दबाव भी घटा।

वीआईपी संस्कृति पर सादगी भारी

बरेली डीएम पहले भी अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। उन्होंने कुछ समय पहले अपने काफिले से एस्कॉर्ट वाहन हटाकर साफ संदेश दिया था कि प्रशासन जनता से दूरी बनाकर नहीं, बल्कि आम लोगों के बीच रहकर काम करे। अब अधिकारियों के साथ बस से सफर कर उन्होंने उसी सोच को और मजबूत किया है।

जनता के बीच बढ़ा भरोसा

बस से सफर के दौरान अधिकारियों का व्यवहार भी आम यात्रियों जैसा रहा। रास्ते में लोगों ने जब डीएम और अन्य अधिकारियों को एक साथ बस में देखा तो चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों ने इसे प्रशासन की सादगी और जिम्मेदारी से जोड़ते हुए सराहना की।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में संदेश

डीएम की यह पहल सिर्फ ईंधन बचत तक सीमित नहीं रही, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग का भी संदेश देती नजर आई। जिस दौर में सरकारी खर्च और वीआईपी संस्कृति पर सवाल उठते रहते हैं, उस समय प्रशासन की यह तस्वीर लोगों के बीच नई सोच पैदा कर रही है।

प्रशासनिक गलियारों में अब इस पहल की चर्चा तेज है और माना जा रहा है कि यदि दूसरे जिलों में भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाई जाए तो सरकारी खर्च में बड़ी कमी आने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

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