बदायूं दोहरे हत्या काण्ड मे दो अन्य आरोपी गिरफ्तार प्रशासनिक कार्यवाही जारी अब सीओ पर भी गिरी गाज हटाए
बदायूं : विगत 12 मार्च को थाना मूसाझाग क्षेत्र में एचपीसीएल कंपनी में एक कर्मचारी द्वारा कंपनी के प्रबंधक और उप प्रबंधक की गोली मारकर हत्या करने के मामले में पुलिस बड़ी लापरवाही सामने आने पर पहले तो जनपद एसएसपी ब्रजेश पाठक को हटाया गया उसके बाद थाना प्रभारी सहित अन्य के निलंबन की कार्यवाही अमल में लाई गई आज पुलिस द्वारा डबल मर्डर मामले में दो अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी भी इसके साथ क्षेत्र के पुलिस क्षेत्राधिकारी को भी जिले से हटाकर लखनऊ अटैच करने की कार्यवाही के साथ हत्यारोपी को दुकानों पर बुलडोजर की कार्यवाही करते हुए हत्यारोपी के रसूख को मिट्टी me मिला दिया गया ।
जनपद बदायूँ में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बदायू अंकिता शर्मा के निर्देशन में विवेचना के दौरान साक्ष्य संकलन, इलेक्ट्रोनिक सर्विलांस, परिस्थितिजन्य एवं पुष्टिकारक ठोस साक्ष्यों के आधार पर डबल मर्डर की घटना में नामित मुख्य अभियुक्त अजय प्रताप सिंह के साथ इस घटना के अपराधिक षडयन्त्र एवं घटना को सुगम बना कर सहयोग प्रदान करने में इसके साथी धर्मेन्द्र यादव एवं मुनेन्द्र विक्रम सिंह की भी अपराध में संलिप्ता रही है। धर्मेन्द्र यादव एवं मुनेन्द्र विक्रम सिंह का नाम भी अभियुक्त के रूप में प्रकाश में आया है। आज प्रकाश में आये अभियुक्त धर्मेन्द्र यादव एवं मुनेन्द्र विक्रम सिंह को मूसाझाग पुलिस द्वारा नियमानुसार गिरफ्तार कर पूछताछ की गयी है। अभियुक्त द्वारा घटना में संलिप्त रहना स्वीकार किया गया है। इनके विरूद्ध उचित वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।
गिरफ्तार किये गये दोनो अभियुक्तो से पूछताछ किये जाने पर दोनो अभियुक्तों धर्मेन्द्र यादव व मुनेन्द्र विक्रम सिंह द्वारा जुर्म की स्वीकार करते हुए यह बताया गया है कि वह दोनो कंपनी में काम करते है। धर्मेन्द्र यादव कम्पनी में लगी बुलेरो गाडी चलाता है तथा मुनेन्द्र विक्रम सिंह गैस किट आपरेटर का काम करता है। इनकी मुख्य अभियुक्त अजय प्रताप सिंह से पुरानी दोस्ती है । इन तीनो द्वारा योजनाबद्ध रूप से दोहरे हत्या काण्ड घटना को अन्जाम दिया गया है। अजय प्रताप सिंह का फैक्ट्री में आवागमन प्रतिबंधित होने के कारण बुलेरो गाडी के चालक अभियुक्त धर्मेन्द्र यादव द्वारा घटना के दिन अपनी गाडी मुख्य अभियुक्त अजय प्रताप सिंह को फैक्ट्री में आने जाने के लिये स्वेच्छा से दी गयी। अभियुक्त मुनेन्द्र विक्रम सिंह द्वारा घटना के दिन फैक्ट्री के मुख्य प्रवेश द्वार पर नियुक्त गार्ड को गाडी में फैक्ट्री स्टाफ होने का हवाला देकर गेट खुलवाया गया है जिसके कारण अजय प्रताप फैक्ट्री में अन्दर जाकर घटना कारित में सफल हुआ है। घटना के समय अभियुक्त मुनेन्द्र विक्रम सिंह द्वारा फैक्ट्री के गेट पर रहकर निगरानी की गयी। तथा अजय प्रताप सिंह के आवागमन को सुगम बनाया गया। घटना से पूर्व ही इन तीनो के बीच घटना को कारित करने के बारे में आपसी सहमति बन गयी थी और घटना के समय उक्त दोनो अभियुक्तों की मुख्य अभियुक्त के साथ घटना कारित करने में सक्रिय सहभागिता रही है। घटना से ठीक पहले इनके मध्य मोबाइल पर आपस में हुई वार्ता क्रम से भी इन तथ्यों के अहम एवं पुष्टिकारक साक्ष्य प्राप्त हुए है। दोनो अभियुक्तो की मुख्य अभियुक्त से दोस्ती एवं वर्चस्व बनाये रखने की खातिर घटना में संलिप्ता रही है। इन तथ्यों के आधार पर यह पाया गया है कि मुख्य अभियुक्त अजय प्रताप सिंह द्वारा बुलेरो गाडी को लूटा नहीं गया था अपितु घटना को सुगम बनाने के लिये गाडी के चालक अभियुक्त धर्मेन्द्र यादव द्वारा घटना से पूर्व ही षडयन्त्र के तहत गाडी इस्तेमाल हेतु उसको दी गयी थी।
























