बलिया।पंडित मातादीन शर्मा सारस्वत दार्शनिक-चूड़ामणि सम्मान-2026: बलिया के डॉ. विद्यासागर उपाध्याय हुए सम्मानित

पंडित मातादीन शर्मा सारस्वत दार्शनिक-चूड़ामणि सम्मान-2026: बलिया के डॉ. विद्यासागर उपाध्याय हुए सम्मानित

संजीव सिंह ।बलिया

पडरौना (कुशीनगर)। पंडित मातादीन शर्मा सारस्वत की 95वीं जयंती पर हनुमान इण्टर कॉलेज, पडरौना में आयोजित भव्य संगोष्ठी व विद्वत् सम्मान समारोह में बलिया के प्रख्यात दार्शनिक व लेखक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को प्रतिष्ठित “पंडित मातादीन शर्मा सारस्वत दार्शनिक-चूड़ामणि सम्मान-2026” से सम्मानित किया गया। समारोह में हजारों विशिष्टजन, विद्वान और समाजसेवी उपस्थित रहे।
समारोह के आयोजक मंडल ने डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को 24 उच्चकोटि ग्रंथों के लेखन, भारतीय दर्शन व ज्ञान-परम्परा के प्रचार-प्रसार तथा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके विद्वत् योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया। मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित डॉ. उपाध्याय ने अपना सारगर्भित बौद्धिक उद्बोधन प्रस्तुत किया जिसे उपस्थितजन ने बड़ी श्रद्धा से सुना।
सम्मान प्रदान करते हुए पडरौना के विधायक मनीष जायसवाल, भाजपा कुशीनगर के जिलाध्यक्ष दुर्गेश राय, उ.प्र. प्रधानाचार्य परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष व शास्त्रज्ञ डॉ. मणिशंकर तिवारी, कुशीनगर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. के. पी. गौड़, और आयोजक मनेोज शर्मा सारस्वत ने डॉ. विद्यासागर की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के संयोजक व प्रधानाचार्य शैलेन्द्र दत्त शुक्ल ने आयोजन की सफलता के लिए आयोजक टीम का धन्यवाद किया।
कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ. अभिषेक शुक्ला, डॉ. कमलेश वर्मा, डॉ. राजीव मिश्र, डॉ. सिद्धार्थ पाण्डेय, डॉ. पल्लवी सिंह, डॉ. संदीप अरुण श्रीवास्तव, डॉ. संजीव सुमन तथा डॉ. प्रवीण राव सहित कई गणमान्य उपस्थित थे। बलिया के विद्वत्समाज, साहित्यकारों व शिक्षाविदों ने इस सम्मान पर गहरा हर्ष व्यक्त करते हुए डॉ. विद्यासागर को बधाई दी।
इस अवसर पर अनेक संतों व विद्वानों—महामण्डलेश्वर सुमनानन्दन गिरि जी महाराज, स्वामी आनन्द स्वरूप जी महाराज, महामण्डलेश्वर कौशलेन्द्र गिरि जी महाराज, महामण्डलेश्वर सुधाकर पुरी जी महाराज, डॉ. जनार्दन राय, नवचन्द तिवारी, शिवजी पाण्डेय ‘रसराज’, नन्द जी नन्दा इत्यादि ने भी हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। आयोजन ने पंडित मातादीन शर्मा सारस्वत की स्मृति को सम्मानित करते हुए भारतीय ज्ञान-परम्परा के संरक्षण व संवर्धन की प्रेरणा दी।

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