शाहजहांपुर।जब गहरे जख्म को लिए घूम रहे राहुल के लिए देवदूत बने एडीएम अरविंद कुमार निजी अस्पताल में कराया भर्ती

जब गहरे जख्म को लिए घूम रहे राहुल के लिए देवदूत बने एडीएम अरविंद कुमार निजी अस्पताल में कराया भर्ती

12 वर्षीय राहुल के माता पिता की हो चुकी है मौत और आर्थिकी तंगी के कारण संरक्षक नहीं करा पा रहे इलाज

मुजीब खान

शाहजहांपुर। घर से मस्जिद बड़ी दूर है , कुछ यूं कर ले किसी रोते हुए को हसाया जाए ,, उक्त शेर की यह पंक्तियां आज उस समय जनपद के अपर जिला अधिकारी अरविंद कुमार पर सटीक बैठती दिखी जब वह सरकारी कार्य से कही जाने को अपनी गाड़ी में बैठे ही थे कि उनकी निगाह कलेक्ट्रेट परिसर में खड़े एक ई रिक्शा पर पड़ी जिसमें करीब 12 साल का एक बच्चा बैठा हुआ रो रहा था उसके एक पैर में बहुत बड़ा जख्म था उसके साथ एक महिला और पुरुष भी मौजूद थे थके हारे शरीर के भाव चेहरों पर साफ दिखाई दे रहे थे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उस समय वह शायद किसी देवदूत का इंतजार कर रहे है, यह दृश्य देखकर एक अधिकारी होनें से पूर्व एक मानव होने के कर्तव्य उन्हें रोक नहीं पाया और गाड़ी से उतरकर पहुंच गए उसके पास।

 पास जाकर उन्होंने पाया कि बालक की स्थिति बेहद गंभीर थी। उसके एक पैर में गहरा जख्म था, जो समय पर उपचार न मिलने के कारण लगातार बिगड़ता जा रहा था। बातचीत में पता चला कि राहुल के माता-पिता नहीं हैं और उसका पालन-पोषण करने वाले संरक्षक आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं। संसाधनों के अभाव में वे बच्चे का समुचित उपचार नहीं करा पा रहे थे, जिसके कारण उसके पैर का घाव लगातार गंभीर होता जा रहा था। बच्चे की पीड़ा और उसके परिजनों की बेबसी को देखकर एडीएम वित्त भावुक हो उठे।

उन्होंने बिना देर किए तत्काल आवश्यक व्यवस्थाएं कराईं और बालक को उपचार के लिए एक निजी अस्पताल भिजवाया। साथ ही उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से भी बात कर बच्चे के इलाज में किसी प्रकार की कमी न रहने के निर्देश दिए। एडीएम वित्त ने आश्वस्त किया कि राहुल के उपचार के लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए उन्होंने बच्चे के साथ आई महिला को तत्काल आर्थिक सहायता भी प्रदान की, ताकि प्रारंभिक उपचार और अन्य आवश्यक जरूरतों में कोई बाधा न आए।

 एडीएम वित्त की इस संवेदनशील पहल की लोग सराहना कर रहे है। एक ओर जहां प्रशासनिक अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं, वहीं ऐसे अवसर यह साबित करते हैं कि संवेदनशीलता और मानवता ही प्रशासन की सबसे बड़ी ताकत है। राहुल के लिए यह मदद केवल इलाज की व्यवस्था नहीं, बल्कि एक नई उम्मीद और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

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