बदायूं : डबल मर्डर मामले में बड़ी कार्यवाही हत्यारोपी की दुकानों पर चला बुलडोजर मिट्टी में मिली रसूख 

 डबल मर्डर मामले में बड़ी कार्यवाही हत्यारोपी की दुकानों पर चला बुलडोजर मिट्टी में मिली रसूख 

मुजीब खान

बदायूं : जनपद में विगत 12 मार्च को एचपीसीएल कंपनी के प्रबंधक और उप प्रबंधक हत्या कांड में अब प्रशासन कार्यवाही करने के मूड में आ गया है वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के स्थानांतरण से लेकर थाना प्रभारी और पुलिस कर्मियों पर कार्यवाही के बाद आज हत्यारोपी अजय प्रताप सिंह की छह दुकानों पर प्रशासन का बुलडोजर गरजा जिससे हत्यारोपी का रसूख मिट्टी में मिला दिया गया।

हत्यारोपी ने हजरतपुर मार्ग अवैध रूप से छह दुकानों का निर्माण कराया गया था उन्हें आज दातागंज तहसील और पीडब्ल्यूडी की टीम ने सैजनी गांव पहुंच कर गिराना शुरू कर दिया है। इससे पहले घटनाक्रम के अनुसार, नौकरी से निकालने पर बौखलाए अजय प्रताप सिंह ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम के उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता और सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा की हत्या कर दी। उसने गुरुवार दोपहर को सैजनी गांव के कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) प्लांट में घुसकर दोनों अफसरों को दौड़ाकर गोलियां मारीं इसके बाद थाने पहुंचकर कहा, ‘दोनों की हत्या कर आया हूं।’ उसका दुस्साहस एक दिन में दोहरे हत्याकांड तक नहीं पहुंचा। वह छह महीने से धमका रहा था, इससे परेशान नोएडा निवासी सुधीर गुप्ता स्वेच्छिक सेवानिवृति ले चुके थे। उनका कार्यकाल 31 मार्च तक था। उन्होंने अजय पर दो मुकदमे दर्ज कराए परंतु, पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी नहीं की थी।

जानकारी के अनुसार अजय प्रताप नौकरी के दौरान वह अक्सर दबंगई दिखाता, अफसर टोकते तो उन्हें हड़का देता था। उसने एक फर्म बनाकर पराली आपूर्ति भी शुरू कर दी थी। करीब एक साल पहले सुधीर गुप्ता उप महाप्रबंधक बनकर आए तो उन्होंने अजय पर सख्ती शुरू की। चार महीने पहले ठेकेदार से कहकर उसे नौकरी से निकाला तो रंजिश मानने लगा। वह अक्सर जबरन प्लांट में घुसकर धमकाता था कि नोएडा के बदमाशों के गिरोह का सदस्य है। अपने शरीर पर चाकू के निशान दिखाकर कहता कि मरने का डर नहीं है मगर, छोड़ूंगा किसी को नहीं। प्लांट कर्मचारियों ने बताया कि प्रवेश प्रतिबंधित होने के बावजूद वह जबरन आकर रंगदारी भी वसूलता था। उससे परेशान होकर सुधीर गुप्ता ने अक्टूबर में धमकाने, काम में बाधा डालने आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। जनवरी में उसने सुधीर गुप्ता को रास्ते में घेरने का प्रयास किया।

उनकी कार का पांच किमी तक पीछा किया, डराया-धमकाया ताकि वह नौकरी छोड़कर भाग जाएं। ऐसे में सुधीर ने चार फरवरी को उसके विरुद्ध अपहरण के प्रयास, धमकाने, प्लांट में दबंगई दिखाने का मुकदमा दर्ज कराया था। वह छह महीने से बेहद तनाव में थे परंतु, पुलिस इस प्रकरण को गंभीरता से नहीं ले रही थी। 12 मार्च को दोपहर एक बजे अजय दूसरी शिफ्ट कर्मचारियों को लाने वाली बोलेरो में बैठकर प्लांट के अंदर तक पहुंच गया। उसे पता था कि यदि वह पैदल या अपने वाहन से आया तो गेट पर रोक लिया जाएगा। ऐसे में बोलेरो चालक को धमकाकर उसमें बैठ गया। परिसर में पहुंचकर वह प्रशासनिक भवन की ओर बढ़ा तो कर्मचारियों ने रोक लिया। इसी बात नोकझोंक व शोर-शराबा होने पर सुधीर गुप्ता व हर्षित मिश्रा बाहर आए। उन्हें देखते ही अजय ने पिस्टल तान दी। सुधीर बचकर भागे तो उसने पीछा कर उनके माथे व सीने पर गोलियां मारीं। इस बीच हर्षित के सामने पर उनके सीने में फायर झोंक दिया। तीन गोलियां लगने से दोनों अफसर लहूलुहान होकर गिर गए। चीख-पुकार व अफरातफरी के बीच कर्मचारियों ने पुलिस को फोन किया, इस बीच आरोपित भागकर थाने पहुंच गया। हालांकि, पुलिस का कहना है कि उसे दबिश देकर गिरफ्तार किया। तत्कालीन एसएसपी बृजेश कुमार सिंह ने बताया था पुलिसकर्मी सुधीर व हर्षित को सामुदायिक स्वास्थ्य लेकर गए मगर, चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। हर्षित पीलीभीत के पूरनपुर के रहने वाले थे।

जानकारी के अ हत्यारोपित अजय प्रताप सिंह कुछ वर्ष पहले निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य बना था। उसकी कई नेताओं से नजदीकी थी। गांव में उसकी ऐसी हनक थी कि अपने शार्गिद को प्रधान बनवा दिया था। सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान अपनी मां किरन देवी के नाम आवंटित करा ली थी। वह नौकरी के बहाने फैक्ट्री के अंदर प्रवेश पाकर पराली का ठेका लेने लगा था। स्थानीय होने के कारण कंपनी के लोगों से रंगदारी वसूलता था। सुधीर गुप्ता ने इन सब पर रोक लगा दी, इसी कारण वह बौखला गया।

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