पीलीभीत में ब्रेन डेड महिला के लिया सड़क का गड्ढा बना वरदान गाड़ी में लगा झटका मृत शरीर में लौट आई जान 

पीलीभीत में ब्रेन डेड महिला के लिया सड़क का गड्ढा बना वरदान गाड़ी में लगा झटका मृत शरीर में लौट आई जान 

पीलीभीत। अभी तक आपने सुना और पढ़ा होगा कि सड़क में गड्ढों के कारण किसी की मौत हो गई या कोई गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे लेकर लोग प्रशासन को कोसते दिखते थे लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि सड़क के गड्ढे के किसी के जीवनदायिनी साबित हुए किसी के मृत शरीर में सड़क के गड्ढे के कारण जान लौटी हो तो कोई इस बात पर विश्वास नहीं करेगा लेकिन पीलीभीत की एक अनोखी घटना ने इस बात पर विश्वास करने पर विवश कर दिया है यहां एक ब्रेन डेड महिला को अस्पताल ने मृत घोषित कर दिया घर में अंतिम संस्कार की तैयारियों चलने लगी लेकिन इसी बीच सड़क के गड्ढे ने एक चमत्कार करके महिला के शरीर में जान लौटा दी अब महिला पूर्ण स्वास्थ्य है।

जानकारी के अनुसार नगर पीलीभीत के गोकुलपुरम कालोनी निवासी विनीता शुक्ला 50 घर में कार्य करते समय अचानक गिर जाने के बाद बेहोश हो गई जिन्हें आनन फानन में परिजन अस्पताल ले कर भागे जहां उन्हें सीरियस हालत होने पर बरेली के निजी अस्पताल रेफर कर दिया गया जहां इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित करते हुए उन्हें ब्रेन डेड बताया और अस्पताल से छुट्टी दे दी बोझिल मन से परिजन उनके मृत शरीर को एंबुलेंस से लेकर घर रवाना हुए और घर में अन्तिम संस्कार की तैयारियों शुरू हो गई इसी बीच एम्बुलेस सड़क के बीच बने एक गड्ढे में जाने से बहुत जोर का झटका लगा और मृत महिला उछल कर गिर गई इसी बीच एक चमत्कार हुआ महिला के शरीर में अचानक चेतना लौट आई परिजनों ने देखा कि उनकी सांस चलने लगी है। यह देखकर परिवार हैरान रह गया और तुरंत उन्हें अंतिम संस्कार के लिए ले जाने की बजाय पीलीभीत के डॉक्टर राकेश न्यूरो सिटी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे अस्पताल में डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया उधर अस्पताल में लगातार 14 दिनों तक चले इलाज के बाद विनीता की हालत में तेजी से सुधार हुआ और आखिरकार वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो गईं फिलहाल महिला के सही होने बाद लोग इसको चमत्कार से कम नहीं समझ रहे हैं और इसकी खासा चर्चा है।

इस चमत्कार को देखकर न्यूरो सिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर राकेश सिंह का कहना है कि महिला का ब्रेन डेड होने के बाद अंतिम संस्कार के लिए ले जा रहे परिजन सारी तैयारियां कर चुके थे अचानक झटके से सांस आई तो मरीज मेरे पास लाए, मुझे भी उम्मीद नहीं थी क्योंकि हाथ पैर,आंखों की पुतली फैल चुकी थी परिजनों के कहने पर मैंने महिला को एडमिट किया ऊपर वाले की इच्छा, मरीज के परिजनों ने भरोसा किया, जिसकी वजह से महिला की जान बच पाई।

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