असमंजस खत्म दो- तीन मार्च की आधी रात को जलेगी होली
बदायूं । कब है होली इसी को लेकर लोग असमंजस में हैं,शास्त्रों के अनुसार भद्रा समाप्ति के समय होलिका दहन करने का विधान है। ज्योतिषाचार्य प्रवीण शर्मा ने बताया कि इस वर्ष चंद्र ग्रहण और भद्रा के कारण होलिका दहन के मुहूर्त में असमंजस बना हुआ है। दो और तीन मार्च की रात 12:40 से 2:50 बजे के बीच ही होलिका दहन शुभ होगा।
तीन मार्च को सुबह चंद्र ग्रहण का सूतक लग जाएगा इसलिए इस दिन होलिका दहन नहीं होगा। तीन की रात को पूर्णिमा नहीं रहेगी, इसलिए ग्रहण के बाद भी होलिका दहन नहीं किया जा सकता। ऐसे में चार मार्च को होली का त्योहार मनाया जाएगा।
नगर के विद्वानों अनुसार होलिका दहन तीन शास्त्रीय नियमों का पालन करते हुए किया जाता है। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि हो, रात्रि का समय हो व भद्रा बीत चुकी हो। इस साल दो मार्च को शाम 5:18 बजे से फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा प्रारंभ हो रही है और इसी के साथ भद्रा भी शुरू हो जाएगी जो सुबह 4:56 बजे तक रहेगी। भद्रा मुख को छोड़कर भद्रा पुच्छ में रात 11:53 बजे से 12:50 बजे के बीच होलिका दहन का मुहूर्त बन रहा है। इसलिए होलिका दहन दो मार्च को होगा।
पूर्णिमा मंगलवार को शाम 4:33 बजे तक है। पड़वा बुधवार को होगी और इसी दिन रंग चलेगा।
ज्योतिषाचार्य प्रवीण शर्मा के अनुसार होलिका दहन से पहले विधिवत पूजन का विशेष महत्व है। पूजन करते समय श्रद्धालु पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। पूजा थाली में रोली, पुष्प, नारियल, कच्चा सूत, साबुत हल्दी, मूंग, गुलाल, पांच प्रकार के अनाज, गेहूं की बालियां और जल से भरा लोटा रखें। परिवार सहित सात परिक्रमा कर कच्चा सूत लपेटना शुभ माना गया है। पूजन के बाद जल अर्पित कर निर्धारित मुहूर्त में होलिका दहन करें। ग्रहण काल में भोजन में तुलसी पत्र डालना, मंत्र जाप करना और ग्रहण खत्म होने के बाद गंगाजल से शुद्धि कर दीप जलाना लाभकारी माना गया है।
पूजन के उपाय
1- बाधा निवारण -घी और गोबर के उपले चढ़ाने से और होलिका की अग्नि घर लाने व उसकी राख माथे पर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष दूर होता है।
2- ग्रह शांति – काले तिल अर्पित करने से उग्र ग्रहों का प्रभाव शांत होता है।
3- समृद्धि और आरोग्य – घी, गोबर के उपले और जो की बालियां अग्नि में अर्पित करने से सुख-समृद्धि और बेहतर स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
























